चिरमिरी (जितेंद्र मिश्रा)। काले हीरे की नगरी के रूप में पहचान रखने वाला चिरमिरी शहर आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। लगातार हो रहे पलायन के चलते यहां का व्यापार ठप पड़ता जा रहा है। पलायन और स्थायित्व की समस्या के साथ-साथ अब युवाओं में बढ़ती नशाखोरी की लत गंभीर रूप ले चुकी है।
चिरमिरी शहर में खुलेआम गली-गली बिक रही नशीली सामग्री जैसे गांजा, टैबलेट्स, कोरेक्स एवं अन्य नशीले पदार्थों ने यहां के युवाओं को बर्बादी की राह पर धकेल दिया है। जिस उम्र में युवा शिक्षा, खेल, अच्छी नौकरी और करियर की ओर अग्रसर होने चाहिए थे, वे आज नशे के गर्त में डूबते जा रहे हैं। नशे के आदी कई युवक आर्थिक तंगी के चलते चोरी जैसी घटनाओं को अंजाम देने लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार, चिरमिरी के विभिन्न वार्डों और क्षेत्रों में यह अवैध व्यापार बेरोकटोक जारी है। दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि स्थानीय पुलिस प्रशासन की ओर से इन गतिविधियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे नशे का कारोबार करने वालों के हौसले और भी बुलंद हो गए हैं।
उद्योगों और कारखानों के अभाव में चिरमिरी में बेरोजगारी चरम पर है, और यही एक प्रमुख कारण है कि युवा वर्ग रोजगार के अभाव में नशे की ओर तेजी से आकर्षित हो रहा है।
गौरतलब है कि यदि समय रहते नशीले पदार्थों की बिक्री पर कड़ी रोक नहीं लगाई गई, तो यह समस्या आने वाले समय में और विकराल रूप ले सकती है। नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में सघन जांच अभियान चलाकर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।


