चिरमिरी में कबाड़ का काला कारोबार: बंद खदानें बनीं चोरी का अड्डा, कबाड़ सिंडिकेट का अघोषित शासन, प्रशासन मौन

 चिरमिरी (जितेंद्र मिश्रा)। चिरमिरी क्षेत्र में अवैध कबाड़ का काला व्यापार एक बार फिर अपने चरम पर है। भैसा दफाई एवं हल्दीबाड़ी अब कबाड़ियों के गढ़ बन चुके हैं। बंद हो चुकीं कोयला खदानों से लोहे के गेट, पाइप, मशीनरी और तार तक चोरी कर कबाड़ में बेचे जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ खुलेआम और बेखौफ तरीके से हो रहा है।


सूत्रों की मानें तो अब यह धंधा केवल खदानों तक सीमित नहीं रह गया है। कई क्षेत्रों में लोगों के घरों के बाहर रखे लोहे के सामान जैसे गेट के हिस्से और अन्य उपकरण भी चोरी होने लगे हैं। आम जनता में भय का माहौल है कि रात के समय कुछ भी सुरक्षित नहीं है।

जानकारी के अनुसार, पुलिस और प्रशासन को इन गतिविधियों की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई बहुत सीमित है। कबाड़ियों को राजनीतिक संरक्षण भी प्राप्त है, जिसके चलते यह अवैध कारोबार निडरता से फल-फूल रहा है।


कबाड़ सिंडिकेट का जाल: सरकारें बदलीं, धंधा बरकरार

चिरमिरी क्षेत्र में कबाड़ कारोबार कोई नया मामला नहीं है। यह वर्षों से चला आ रहा है। कई सरकारें आईं और गईं, आंदोलन व प्रदर्शन भी हुए, लेकिन यह अवैध धंधा कभी रुका नहीं। बंद खदानों से लेकर नगर निगम की अनुपयोगी संपत्तियों तक, सब पर कबाड़ माफियाओं की नजर बनी हुई है।


आम जनता की प्रशासन से मांग है कि इस अवैध कारोबार पर सख्त लगाम लगाई जाए, ताकि सरकारी ही नहीं, निजी संपत्तियों की भी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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